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फोलियर फीडिंग का महत्‍व
Image August 16, 2018 Blog admin

फोलियर फीडिंग पौधों को भोजन देने की एक तकनीक है जिसमें तरल उर्वरक को सीधे उनकी पत्तियों पे डाला जाता है।   पोषक तत्‍व कैसे अवशोषित होते हैं? पौधे अपने पत्तियों के माध्‍यम से आवश्‍यक पोषक तत्‍वों को अवशोषित करते हैं। यह अवशोषण उनके स्‍टोमैटो और उनके एपिडर्मिस के माध्‍यम से होता है। पोषक तत्‍वों
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‘फोलिअर फीडिंग’चे महत्व
Image August 9, 2018 Blog admin

‘फोलिअर फीडिंग’ हे रोपांना पोषण पुरविण्याचे एक असे तंत्र आहे, ज्यामध्ये थेट रोपांच्या पानांवर द्रवरूप खतांचा फवारा केला जातो.   पोषणद्रव्ये, पोषक घटक कसे शोषले जातात? वनस्पतीला आवश्यक असलेले पोषण घटक पानांच्या माध्यमातून शोषून घेण्याची क्षमता रोपांमध्ये असते. रोपांच्या स्टोमाटा रंध्रांद्वारे आणि एपीडर्मिसद्वारे पोषण शोषणाचे काम होते. पोषणद्रव्यांचे वहन हे सहसा रंध्रांच्या माध्यमातून अधिक जलद
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मक्‍का उत्‍पादन में जिंक की भूमिका
Image July 13, 2018 Blog admin

जिंक उच्‍च पैदावार वाले मक्‍के की फसल के लिये एक सबसे महत्‍वपूर्ण माइक्रोन्‍यूट्रीएंट्स (सूक्ष्‍म पोषक तत्‍व) है। जिंक एक माइक्रोन्‍यूट्रीएंट्स है, जिसका मतलब यह है कि मक्‍के के पौधे को इसकी जरूरत बेहद कम मात्रा में होती है। वास्‍तव में, प्रति एकड़ जिंक की जरूरत नाइट्रोजन एवं पोटैशियम की तुलना में काफी कम मात्रा में
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कपास की फसल लगाने के तरीके
Image June 15, 2018 Blog admin

उच्‍च पैदावार वाली कपास की फसल उगाने का प्रयास प्रबंधन योजना से शुरू होता है। पौधों को सही अन्‍तर पर लगाकर उनकी संख्‍या को जमीन,पानी की सुविधा और कपास की प्रजाति के अनुसार उचित रखने से खेतों में पैदावार को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वर्षा आधारित कपास के बीजों को लगाने के बीच
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केले के पौधों को सहारा देना या रस्सी से बांधना
Image May 30, 2018 Blog admin

गुच्छेदार पौधों को उखाड़ फेंकना या तोड़ना, फल की उपज या गुणवत्ता हानि का एक प्रमुख कारण है। पानी और पोषक तत्वों की कमी से जड़ों का कमजोर और सतही हो जाना, तेज हवा या वजनदार गुच्छों का होना इस समस्या के मुख्य कारण हैं। इस नुकसान की मात्रा को रोकने या कम करने के
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कपास उत्पादन तकनीक
Image May 16, 2018 Blog admin

कपास 100 से अधिक देशों में उगाया जाता है हालांकि, विश्व उत्पादन का 75 प्रतिशत चीन, अमेरिका, भारत, पाकिस्तान और ब्राजील से आता हैA यद्यपि भारत में इसका रकबा सबसे ज्यादा है, लेकिन उत्पादकता सबसे कम यानी 482 किलोग्राम/हेक्टेयर है। महाराष्ट्र में रकबा उच्चतम (3-87 एम हेक्टेयर) है, लेकिन महाराष्ट्र की उत्पादकता (323½ किलोग्राम/हेक्टेयर है,
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गन्ने में खूंटी (रेटून) का प्रबंधन
Image April 2, 2018 Blog admin

अगर उचित ढंग से प्रबंधन किया जाए तो गन्ने की खूंटी या ठूंठ (पके गन्ने के टुकड़े जिन्हें अगली फसल के लिए खेत में रोपा जाता है) से भी अच्छा मुनाफा कमाया जाता है, क्योंकि इनकी लागत कम और उत्पादन शक्ति गन्ने के मूल पौधे के सामान होती है। पश्चिमी महाराष्ट्र में कुछ किसानों ने
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पौधों की संख्या नियंत्रित करने के लिए केले में चूसक का प्रबंधन
Image April 2, 2018 Blog admin

केले की अगली फसल में फसल की उपज का वांछित स्तर बनाए रखने के लिए केले की खेती के पूरी अवधि में मूल पौधे के घनत्व और पौधा रोपण का पैटर्न बरकरार रखना चाहिए। इसके लिए जल्दी से जल्दी गैप को भरना और समय पर चूसक का चुनाव करना बेहद ज़रूरी होता है। चूसक (पौधे
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अनार के नए उगाए गए पेड़ों की देखभाल
Image April 2, 2018 Blog admin

अनार झाड़ियों पर उगता है और इसे प्राकृतिक रूप बढ़ने को छोड़ दिया जाए तो यह एक सामान्य पेड़ की शक्ल में विकसित नहीं नहीं होता। इसलिए अनार की अच्छी उपज प्राप्त करने और इसके कुशल प्रबंधन के लिए इसे उचित आकार और ढांचा मुहैया कराना बहुत जरूरी है। अनार का पौधा लगाने के बाद
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पौधे की वृद्धि और विकास में पोटेशियम (के) की भूमिका
Image March 7, 2018 Blog admin

पोटेशियम कई पादप प्रक्रियाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यह विकास में कई महत्वपूर्ण नियामक भूमिकाएं निभाता है। एंजाइम ऐक्‍टीवेशन: पोटेशियम पौधे की वृद्धि में शामिल कम से कम 60 विभिन्न एंजाइमों को “सक्रिय” करता है। पोटेशियम (के) एंजाइम अणु के भौतिक आकार को बदलता है, प्रतिक्रिया के लिए रासायनिक रूप से सक्रिय यथोचित
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