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रब्बी पिकांमधील गंधकाची भूमिका, एफआरटी बेनसल्फच्या माध्यमातून गंधकाची उपलब्धता पिकांच्या सकसतेत असलेले गंधक “एस” चे महत्व
Image October 1, 2018 Blog admin

पीक पोषण शास्त्रात पहिले तीन महत्वाचे मुख्य/मोठे वनस्पती पोषक घटक आहेत: १. नायट्रोजन, २. फॉस्फोरस, ३. पोटॅश सुरुवातीला वनस्पतींना गरजेच्या असणाऱ्या पोषक घटकांमध्ये कॅल्शियम (४था क्रमांक) आणि मॅग्नेशियम (५ क्रमांक) यांच्यापाठोपाठ गंधक हे ६व्या क्रमांकावरील महत्वाचा पोषक घटक मानले जायचे. विविध जातीच्या नगदी पिकांचे वाढलेले उत्पादन, वाढते सखोल पीक नमुने, ओलिताखाली असलेल्या लागवड क्षेत्राचे वाढलेले
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टमाटर की पैदावार बढ़ाने के उपाय
Image September 14, 2018 Blog admin

मिट्टी का प्रकार:लाल रेतीली दोमट मिट्टी, कार्बनिक तत्‍वों से भरपूर होती है, जो कि 6.0-7.0 पीएच के साथ टमाटर की पैदावार के लिये उपयुक्‍त है। मौसम:21 डिग्री से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्‍छी गुणवत्‍ता के फल के लिये सबसे अच्‍छा होता है। 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक का तापमान फलों की खेप और विकास को
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अड़साली गन्‍ने को रोपने और उसकी शुरूआती वृद्धि के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां
Image August 29, 2018 Blog admin

अड़साली गन्‍ने को जून से अगस्‍त के महीनों के दौरान कृषिजलवायु संबंधी क्षेत्र में होने वाली बारिश के स्‍वरूप के आधार पर रोपा जाता है। अड़साली गन्‍ने को विकसित होने में लगभग सोलह से अठारह महीनों का समय लगता है और इसलिये इसमें सबसे ज्‍यादा गन्‍ना और चीनी प्रदान करने का सामर्थ्‍य होता है। बेहतर
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आडसाली ऊसाची लागवड करताना आणि वाढीच्या प्रारंभिक टप्प्यात घ्यावयाची काळजी
Image August 29, 2018 Blog admin

आडसाली ऊसाची लागवड साधारण जुन ते ऑगस्ट महिन्या दरम्यान जेथे लागवड करायची त्या कृषी क्षेत्रातील मोसमी पावसाचे प्रमाण कसे आहे त्यानुसार केली जाते. आडसाली ऊसाला वाढीसाठी सुमारे १६ ते १८ महिने लागू शकतात आणि त्यामुळे उसाची सर्वाधिक क्षमता कामी येऊन अधिकाधिक साखर मिळण्यास यामध्ये वाव असतो. अधिक चांगल्या वाढीसाठी आणि उत्पादकतेसाठी याची सुरुवात जोमदार व्हायला
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फोलियर फीडिंग का महत्‍व
Image August 16, 2018 Blog admin

फोलियर फीडिंग पौधों को भोजन देने की एक तकनीक है जिसमें तरल उर्वरक को सीधे उनकी पत्तियों पे डाला जाता है।   पोषक तत्‍व कैसे अवशोषित होते हैं? पौधे अपने पत्तियों के माध्‍यम से आवश्‍यक पोषक तत्‍वों को अवशोषित करते हैं। यह अवशोषण उनके स्‍टोमैटो और उनके एपिडर्मिस के माध्‍यम से होता है। पोषक तत्‍वों
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‘फोलिअर फीडिंग’चे महत्व
Image August 9, 2018 Blog admin

‘फोलिअर फीडिंग’ हे रोपांना पोषण पुरविण्याचे एक असे तंत्र आहे, ज्यामध्ये थेट रोपांच्या पानांवर द्रवरूप खतांचा फवारा केला जातो.   पोषणद्रव्ये, पोषक घटक कसे शोषले जातात? वनस्पतीला आवश्यक असलेले पोषण घटक पानांच्या माध्यमातून शोषून घेण्याची क्षमता रोपांमध्ये असते. रोपांच्या स्टोमाटा रंध्रांद्वारे आणि एपीडर्मिसद्वारे पोषण शोषणाचे काम होते. पोषणद्रव्यांचे वहन हे सहसा रंध्रांच्या माध्यमातून अधिक जलद
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मक्‍का उत्‍पादन में जिंक की भूमिका
Image July 13, 2018 Blog admin

जिंक उच्‍च पैदावार वाले मक्‍के की फसल के लिये एक सबसे महत्‍वपूर्ण माइक्रोन्‍यूट्रीएंट्स (सूक्ष्‍म पोषक तत्‍व) है। जिंक एक माइक्रोन्‍यूट्रीएंट्स है, जिसका मतलब यह है कि मक्‍के के पौधे को इसकी जरूरत बेहद कम मात्रा में होती है। वास्‍तव में, प्रति एकड़ जिंक की जरूरत नाइट्रोजन एवं पोटैशियम की तुलना में काफी कम मात्रा में
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कपास की फसल लगाने के तरीके
Image June 15, 2018 Blog admin

उच्‍च पैदावार वाली कपास की फसल उगाने का प्रयास प्रबंधन योजना से शुरू होता है। पौधों को सही अन्‍तर पर लगाकर उनकी संख्‍या को जमीन,पानी की सुविधा और कपास की प्रजाति के अनुसार उचित रखने से खेतों में पैदावार को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वर्षा आधारित कपास के बीजों को लगाने के बीच
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केले के पौधों को सहारा देना या रस्सी से बांधना
Image May 30, 2018 Blog admin

गुच्छेदार पौधों को उखाड़ फेंकना या तोड़ना, फल की उपज या गुणवत्ता हानि का एक प्रमुख कारण है। पानी और पोषक तत्वों की कमी से जड़ों का कमजोर और सतही हो जाना, तेज हवा या वजनदार गुच्छों का होना इस समस्या के मुख्य कारण हैं। इस नुकसान की मात्रा को रोकने या कम करने के
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कपास उत्पादन तकनीक
Image May 16, 2018 Blog admin

कपास 100 से अधिक देशों में उगाया जाता है हालांकि, विश्व उत्पादन का 75 प्रतिशत चीन, अमेरिका, भारत, पाकिस्तान और ब्राजील से आता हैA यद्यपि भारत में इसका रकबा सबसे ज्यादा है, लेकिन उत्पादकता सबसे कम यानी 482 किलोग्राम/हेक्टेयर है। महाराष्ट्र में रकबा उच्चतम (3-87 एम हेक्टेयर) है, लेकिन महाराष्ट्र की उत्पादकता (323½ किलोग्राम/हेक्टेयर है,
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