अंगूर की खेती युक्तियाँ


Climate & Soils

जलवायु और मिट्टी

 

Land Preparation

भूमि की तैयारी

 

Seed Rate & Spacing

बीज दर और दूरी

 

Intercultural Operations

अन्त:फसलिकरण प्रबंध

 

Crop Nutrition Management

फसल पोषण प्रबंधन

 

What nutrients does a grape plantation require?

अंगूर के बागान को किन पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है?

 

What DFPCL’s Mahadhan Products meet these plant nutrition needs of the grape plantation?

दीपक फर्टिलाइजर्स के कौनसे महाधन उत्पाद अंगूर के बागान के पोषण आवश्यकताओं को पूरा करते हैं?

 

When, how, and how much of Mahadhan Fertilizer products to be applied for higher banana yields and better fruit quality?

अंगूर की अधिक उपज और फल की बेहतर गुणवत्ता के लिए, कब, कैसे और कितने महाधन उत्पादों का प्रयोग किया जाना चाहिए?

 

Irrigation Management

सिंचाई प्रबंधन

 

Weeds & Weed Management

खरपतवार और खरपतवार प्रबंधन

 

कीट और रोग प्रबंधन

कीट और रोग प्रबंधन

 

पौधों के रोग और रोग प्रबंधन

पौधों के रोग और रोग प्रबंधन

 

Harvesting & Post Harvest Measures

फसल तोडना और फसल तोडने के बाद उपाय

 

अंगूर भारत के उप-उष्णकटिबंधीय, गर्म उष्णकटिबंधीय और हल्के उष्णकटिबंधीय जलवायु क्षेत्रों में उगाया जाता है। अंगूरों के लिए सर्वोत्तम मिट्टी के प्रकार कार्बनिक पदार्थों से समृद्ध सुखी हुई दोमट,चिकनी बलुई मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है।जल निकास कम होने वाली मिट्टी का उपयोग न करें ।

जमीन को जोता जाता है और 120 मी x 180 मीटर के भूखंडों में 3 मीटर चौड़ी सड़कों से अलग किया जाता है। 75 सेमी चौड़ी और 75 सेमी गहरी और 115 मीटर लंबे गढ्ढे खोदें जाते है। इन्हें 15 दिनों तक धूप दिखाने के बाद 45 सेमी की ऊँचाई तक, ऊपरी मिट्टी से भर दिया जाता हैं।

अंगूर की लता/एकड़ की संख्या किस्मों और रोपण प्रणाली पर निर्भर करती है।
हेड प्रणाली – 1320 अंगूर की लता/एकड़; निफिन प्रणाली – 435 अंगूर की लता/एकड़; बोवर सिस्टम – 224 अंगूर की लता/एकड़। दो लताओं के बिच की दूरी आम तौर पर किस्मों और मिट्टी की उर्वरता के अनुसार भिन्न-भिन्न होती है। अधिक जोरदार किस्मों के लिए 6 मीटर x 3 मीटर या 4 मीटर x 3 मीटर और कम जोरदार किस्मों के लिए 3 मीटर x 3 मीटर या 3 मीटर x 2 मीटर के दूरी का पालन किया जाता है।

अंगूर की लता की छँटाई: भारत में कई छँटाई प्रणालियाँ प्रचलित हैं, लेकिन सबसे लोकप्रिय बोवर, टेलीफोन और फ्लैट रूफ गैबल प्रणालियाँ हैं। अंगूर की लताओं की छँटाई अंगूर के उत्पादकों द्वारा अपनाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण और आवश्यक अन्त:फसलिकरण प्रथा है।

जैविक खाद का उपयोग मिट्टी के कार्बनिक पदार्थ को बनाए रखने में सहायता करता है जो अंगूर की फसल पोषण के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। अंगूर एक भारी पोषक तत्त्व अवशोषक भी है और इसे वानस्पतिक विकास और फल लगने एवं फल विकास चरणों की विभिन्न अवस्थाओं में उचित उर्वरक का प्रयोग करने के माध्यम से आपूर्ति किया जाना चाहिए। अधिकांश अंगूर उत्पादकों ने ड्रिप सिंचाई को अपनाकर, फर्टिगेशन द्वारा पोषक तत्वों की आपूर्ति करना आरंभ कर दिया है।

नत्रजन, फास्फोरस, पोटाशियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम, सल्फर, आयरन, मैंगनीज, ज़िंक, कॉपर, और बोरान

पोषक तत्व महाधन उत्पाद
नत्रजन महाधन सल्फेट (अमोनियम सल्फेट), महाधन कैल्शियम नाइट्रेट
फॉस्फोरस महाधन सुपर
पोटाशियम महाधन पोटाश, पोटाश का सल्फेट, पोटेशियम शोएनाइट,
नत्रजन + फॉस्फोरस महाधन 24:24:0, महाधन 20:20:0-13, महाधन 12:61:0
नत्रजन + पोटाशियम महाधन 13:0:45
नत्रजन + फॉस्फोरस + पोटाशियम महाधन 12:32:16, महाधन 10:26:26, महाधन 16:16:16,महाधन 19:19:19, महाधन 13:40:13
कैल्शियम महाधन कैल्शियम नाइट्रेट (फील्ड ग्रेड)
मैग्नीशियम महाधन मैगसल्फ
सल्फर महाधन बेनसल्फ, ज़िंको बेनसल्फ, महासल्फ
कैल्शियम + मैग्नीशियम + सल्फर कैल्शियम – मैग्निशियम – सल्फर
आयरन महाधन क्रान्ति फेरस सल्फ (मिट्टी में प्रयोग के लिए), महाधन तेज़ फेरस (कीलेट्स)
ज़िंक महाधन क्रान्ति ज़िंकसल्फ 21% और 33% (मिट्टी में प्रयोग के लिए), महाधन तेज़ ज़िंक (कीलेट्स)
मैंगनीज महाधन तेज़ कॉम्बी
तांबा महाधन तेज़ कोम्बी
बोरोन महाधन तेज़ डीओटी और डीटीबी

दीपक फर्टिलाइजर्स उर्वरक उत्पादों की एक श्रृंखला प्रदान करता है जिन्हें अंगूर के उत्पादक भूमि में प्रयोग के लिए और ड्रिप प्रणाली के माध्यम से फर्टिगेशन द्वारा उपयोग कर सकते हैं। अंगूर उत्पादकों द्वारा पालन की जाने वाली अनुसूची नीचे दी गई है:अप्रैल की छँटाई :

मिट्टी के माध्यम से उपयोग की जाए (अप्रैल की छँटाई) – तालिका 1

 

 

अंगूर के लिए अनुशंसित फर्टिगेशन अनुसूची (अप्रैल की छँटाई) – तालिका 2

 

अक्टूबर की छँटाई :

मिट्टी के माध्यम से उपयोग की जाए (अक्टूबर की छँटाई) – तालिका 3

 

अंगूर के लिए अनुशंसित फर्टिगेशन अनुसूची (अक्टूबर की छँटाई) – तालिका-4

फसल की नियमित सिंचाई के माध्यम से मिट्टी की उचित नमी को बनाई रखी जाती है। अंगूर के बागानों की पानी की आवश्यकताओं को अधिक कुशल तरीके से पूरा करने में ड्रिप सिंचाई प्रणाली सहायता करती है।

खरपतवार प्रबंधन

अंगूर की लताओं की पंक्तियों के बीच की खरपतवार को ट्रॅक्टर-से-खींचे जाने वाले औजारों द्वारा यंत्रवत् तरीके से हटाया जाता है। पंक्तियों के भीतर, खरपतवारों को हाथ से फावड़े से हटाया जाता है। कभी-कभी ग्लायफोसेट @ 2.0 किग्रा/हेक्टेयर या पैराक्वैट @ 7.5 किग्रा/हेक्टेयर जैसे उगने के पश्चात् खरपतवार-नाशकों का, अंगूर की पत्तियों पर छिड़काव के झोंके को पड़ने दिए बिना, खरपतवार पर छिड़काव किया जाता है।

  1. सूत्रकृमि (नेमैटोड्स) का प्रबंधन
    छँटाई से एक सप्ताह पहले 60 ग्राम कार्बोफुरन 3जी या फोरेट 10जी ग्रान्यूल्स प्रति अंगूर की लता के प्रयोग और उसके बाद प्रचुर सिंचाई से नेमैटोड्स को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। मिट्टी को कम से कम 15 दिनों तक नहीं छेड़ा जाना चाहिए। इसके बाद खाद डालने का सामान्य काम किया जा सकता है। नीमकेक 200 ग्राम/अंगूर की लता के प्रयोग से भी नेमैटोड्ड को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलती है।
  2. नीम तेल 2 मिलीलीटर के साथ मिश्रित डाइक्लोरवास @ 1 मिलीलीटर या ट्राइडेमोर्फ @ 1 ग्राम का छिड़काव प्रयोग मीली बग की क्षति को न्यूनतम करने में सहायता करता है।
  1. चूर्णिल फफूँद (पाउडरी मिल्ड्यू) का प्रबंधन
    सुबह के समय 0.3% वेटेबल सफ़र या सल्फर की डस्टिंग @ 2.5 – 4.0 किग्रा/एकड़ रोग को नियंत्रित करने में सहायता करती है।
  2. श्यामव्रण(एन्थ्रेकनोज) प्रबंधन
    1% बोर्डोक्स मिश्रण या थियो फैनेट मिथाइल 400 ग्राम या कॉपर ऑक्सी क्लोराइड 400 ग्राम/एकड़ या हेक्साकॉनोजोल @ 200 मिलीलीटर/एकड़ का छिड़काव
  3. मृतशाख रोग (डाउनी मिल्ड्यू) प्रबंधन
    1% बोर्डोक्स मिश्रण या 0.25% सान्द्रता पर कोई भी अन्य कॉपर फफूंदनाशक का छिड़काव।

अंगूरों को सही चरण पर तोडा जाता है और ठीक से पैक किया जाता है ताकि किसानों को उनकी उपज का सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त हो।

Mahadhan SMARTEK