मूंगफली की खेती युक्तियाँ

तापमान और वर्षा जैसी जलवायु की स्थितियाँ मूँगफली की फसल के उत्पादन को महत्वपूर्ण ढंग से प्रभावित करती हैं। तापमान एक प्रमुख पर्यावरणीय कारक है जो फसल विकास की दर को निर्धारित करता है। बढ़ते हुए मौसम के दौरान पर्याप्त और अच्छी तरह से वितरित वर्षा, विशेष रूप से पुष्पण, पेगिंग और फली बनने के चरणों में, अधिकतम उपज और मूँगफली के बीज की गुणवत्ता के लिए आवश्यक है। मूँगफलियाँ 600 से 1500 मिलीमीटर वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाई जाती हैं।

मूँगफली अच्छी तरह से बलुई दोमट, या चिकनी बलुई मिट्टी में उगाई जाती है। 6.5 से 7.0 पीएचमान (pH) वाली गहरी अच्छी निकास वाली भूमि और उच्च उर्वरता मूँगफली के उत्पादन के लिए आदर्श हैं।

समय पर खेत की तैयारी समय पर बुवाई को सुविधाजनक बनाती है, जिससे उच्च उपज सुनिश्चित होती है। भूमि की तैयारी में यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी फसल के अवशेष, फसल के स्वयंसेवी और खरपतवार पूरी तरह से दबा दिए जाने चाहिए । गर्मियों की जुताई खरपतवार के बीजों को मारने, कीटों और रोग पैदा करने वाले जीवों को गर्मियों की धूप में उजागर करने में फायदेमंद है।

32-40 किग्रा/एकड़ की बीज दर गुच्छ प्रकार की किस्मों के लिए उपयोग की जाती है और 24-32 किग्रा/एकड़ की कम दर प्रसरण प्रकारों के लिए अपनाई जाती है। बुवाई हल के पीछे 5 सेंटीमीटर गहरी या बीज बोने की मशीन की सहायता से की जानी चाहिए। गुच्छ प्रकार में पंकित से पंकित की दूरी 30-40 सेमी और प्रसरण किस्मों में 45-60 संटीमीटर होनी चाहिए । पौधे से पौधे की दूरी गुच्छ प्रकार और प्रसरण प्रकार के लिए क्रमशः 15 और 20 होनी चाहिए ।

खरपतवार को नियंत्रित करने और मिट्टी को भुरभुरी स्थिति में रखने के लिए, 1 या 2 महीनों में एक या दो निराईयाँ की जाती हैं। खूँटियों (पेग्स) के भूमिगत होना शुरू करने के बाद कोई अन्त: फसलिकरण प्रबंध नहीं किया जाता है।

मूँगफली के किसान आम तौर पर मूँगफली की फसल के लिए एनपीके उर्वरकों का प्रयोग करते हैं। हालाँकि, यह देखा गया है कि गौण और सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग मूँगफली की फसल की पैदावार और गुणवत्ता को बेहतर ढंग से बढ़ाने के लिए एवं खेत की फसल की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करता है। तदनुसार, मिट्टी और पत्तों में प्रयोग के लिए निम्नानुसार उर्वरक अनुसूचियाँ बनाई गई है:

नत्रजन, फॉफोरस, पोटाशियम, कैल्शियम, मैग्नीसियम, सल्फर, आयरन, मैग्नीज, ज़िंक, कॉपर, और बोरोन

पोषक तत्व महाधन उत्पाद
नत्रजन महाधन सल्फेट (अमोनियम सल्फेट), महाधन कैल्शियम नाइट्रेट
फॉस्फोरस महाधन सुपर
पोटाशियम महाधन पोटाश, पोटाश का सल्फेट, पोटेशियम शोएनाइट,
नत्रजन + फॉस्फोरस महाधन 24:24:0, महाधन 20:20:0-13, महाधन 12:61:0
नत्रजन + पोटाशियम महाधन 13:0:45
नत्रजन+ फॉस्फोरस + पोटाशियम महाधन 12:32:16, महाधन 10:26:26, महाधन 16:16:16, महाधन 19:19:19, महाधन 13:40:13
कैल्शियम महाधन कैल्शियम नाइट्रेट (फील्ड ग्रेड)
मैग्नीशियम महाधन मैगसल्फ
सल्फर महाधन बेनसल्फ, ज़िंको बेनसल्फ, महासल्फ
कैल्शियम + मैग्नीशियम + सल्फर कैल्शियम – मैग्निशियम – सल्फर
आयरन महाधन तेज़ फेरस सल्फ (कीलेट्स), महाधन क्रान्ति फेरस सल्फ
ज़िंक महाधन क्रान्ति ज़िंकसल्फ 21% और 33% (मिट्टी में प्रयोग के लिए), महाधन तेज़ ज़िंक (कीलेट्स)
मैंगनीज महाधन तेज़ कॉम्बी
कॉपर महाधन तेज़ कॉम्बी
बोरोन महाधन तेज़ डीओटी(DOT) और डीटीबी(DTB)

दीपक फर्टिलाइजर्स उर्वरक उत्पादों की एक श्रृंखला प्रदान करता है जिसे मूँगफली के किसान को सीधे मिट्टी में या ड्रिप प्रणाली के माध्यम से प्रयोग कर सकते हैं। ऐसे उर्वरक उत्पाद भी हैं जिन्हें किसान छिडकांव द्वारा फसल पर प्रयोग कर सकते हैं।

मूँगफली के किसानों को दी जाने वाली उर्वरक सूची (भूमि प्रयोग हेतु) (तालिका 1):

 

मूँगफली की फसल के लिए छिडकांव द्वारा प्रयोग हेतु (तालिका 2):

पेगिंग, पुष्पण और फली विकास चरण सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिसके दौरान पर्याप्त मिट्टी की नमी आवश्यक है।

खऱपतवार

मूँगफली ऐसी फसल है जिसे मुख्यतः हल्की मिट्टी में उगाया जाता है जहाँ खरपतवार की आशंका एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न होती है। रेतीली मिट्टी में, घासदार खरपतवार का उपद्रव चौडी पत्तीयों वाली खरपतवार की तुलना में अधिक होता है, जबकि लाल मिट्टी में, घासदार खरपतवार की तुलना में चौडी पत्तीयों वाली खरपतवार की बड़ी समस्या है।

खरपतवार प्रबंधन

  • 0.8 लीटर/एकड़ पर फ्लुक्लोरैलिन का बुआई-पूर्व भूमि प्रयोग हेतु फ्लुक्लोरैलिन @ 0.8 लीटर/एकड़ का उभरने-से-पूर्व प्रयोग या बुवाई के बाद 3सरे दिन पेन्डिमेथैलिन @ 3.3 लीटर/हेक्टेयर के बाद सिंचाई।
  • उभरने-के-बाद (पोस्ट-एमर्जेंस) छिड़काव के रूप में खरपतवार के घनत्व के आधार पर 20-30 दिनों में इमेज़ेथैपायर @ 300 मिलीलीटर/एकड़ का छिड़काव करें।
  • यदि फसल के बाद के चरण पर खरपतवार मौजूद है, तो (एसीफ्लुर्फेन 16.5% + सोडियम क्लैडिनोफॉफ 88%) ईसी @ 400 मिलीलीटर/एकड़ या (इमेज़ेथैपायर 3.75% + प्रोपेक्विज़ाफॉप 2.5%) @ 800 मिलीलीटर/एकड़ या (फॉमेसैफेन + क्विज़ैलोफॉप) ईसी @ 400 मिलीलीटर/एकड़ जैसे किसी उभरने-के-बाद (पोस्ट-एमर्जेंस) खरपतवार का प्रयोग किया जा सकता है।

  1. चना फली वेधक प्रबंधन
    • गर्मियों में गहरी जुताई और मूँगफली की हर 5 या 6 पंक्तियों पर अरहर की एक पंक्ति का अंत: फसलीकरर्
    • फेरोमोन जाल @ 5/हेक्टेयर में स्थापित करें
    • क्विनॉलफॉस 2 मिलीलीटर/लीटर पानी या क्लोरोपायरीफोस 3 मिलीलीटर/लीटर पानी या रायनॉक्सीपायर 185 एससी @ 60 मिलीलीटर/एकड़ या फ्लुबेंडैमाइड 480 एससी @ 40 मिलीलीटर/एकड़ या नोवैलुरॉन 10% ईसी @ 250 मिलीलीटर/एकड़ या इमैमेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी @ 50 ग्राम/एकड़ या (नोवैलुरॉन + इंडोक्साकार्ब) एससी @ 350 मिलीलीटर/एकड़ जैसे कीटनाशकों की छिड़काव करें।
  2. तंबाकू की सूंडी (कैटरपिलर) का प्रबंधन
    • सूचक या जाल फसल का कार्य करने के लिए मूँगफली के खेत में अरंडी को सीमा या अंतःफसल के रूप में उगाएँ
    • अंडे के ढेरों को इकट्ठा करें और नष्ट करें
    • प्रारंभिक अवस्था (इन्स्टार) (पहली से तीसरी अवस्था) के लार्वा को नियंत्रित करने के लिए कार्बैरिल 50 डब्ल्यूपी 2.0 किग्रा/हेक्टेयर या क्विनाल्फॉस 25 ईसी 750 मिलीलीटर/हेक्टेयर या रायनैक्सिपायर 185 एससी @ 60 मिलीलीटर/एकड़ या फ्लुबेन्डैमाइड 480 एससी – 40 मिलीलीटर/एकड़ या नोवैलुरॉन 10% ईसी – 250 मिलीलीटर/एकड़ या इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी – 50 ग्राम/एकड़ या (नोवैलुरॉन + इंडॉक्साकार्ब) एससी @ 350 मिलीग्राम/एकड़ जैसे कीटनाशकों का छिड़काव करें।

  1. किट्ट-रोग (रस्ट डिज़ीज़) प्रबंधन
    मैनकोज़ेब @ 0.4 किग्रा/एकड़ या क्लोरोथैलोनिल @ 0.4 किग्रा/एकड़ या निलंबनशील (वेटेबल) सल्फर 1 किग्रा/एकड़ या ट्रायडेमॉर्फ @ 200 मिलीलीटर/एकड़ का छिड़काव करें।
  2. शुरुआती पत्ती के धब्बों की बीमारी का प्रबंधन
    कार्बेन्डाज़िम @ 200 ग्राम/एकड़ या मैनकोज़ेब @ 400 ग्राम/एकड़ या क्लोरोथैलोनिल @ 400 ग्राम/एकड़ जैसे फफूंदनाशक का छिड़काव करें ।

पुराने पत्तों का सूखना और गिरना और शीर्ष पत्तियों का पीला होना परिपक्वता का संकेत करता है। खडी फसल में से कुछ पौधों को उखाड़ें और फलियों को छीलें। यदि आंतरिक खोल भूरा काला है और सफेद नहीं है, तो फसल परिपक्व हो गई है। यदि मिट्टी सूखी है, तो फसल काटने से पहले सिंचाई करें, क्योंकि इससे फसल निकालना सुविधाजनक हो जाएगा।

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