सोयाबीन की खेती युक्तियाँ

Climate & Soils

जलवायु और मिट्टी

 

Land Preparation

भूमि की तैयारी

 

Seed Rate & Spacing

बीज दर और अंतराल

 

Intercultural Operations

इंटरकल्चरल संचालन

 

Crop Nutrition Management

फसल पोषण प्रबंधन

 

Irrigation Management

सिंचाई प्रबंधन

 

Weeds & Weed Management

खरपतवार और खरपतवार प्रबंधन

 

कीट रोग और रोग प्रबंधन

कीट रोग और रोग प्रबंधन

 

पौधों के रोग और रोग प्रबंधन

पौधों के रोग और रोग प्रबंधन

 

Harvesting & Post Harvest Measures

फसल काटना और फसल काटने के बाद के उपाय

 

सोयाबीन गर्म और नम जलवायु में अच्छी तरह से पनपता है सोयाबीन की किस्मों में दिन की लम्बाई महत्वपूर्ण कारक है क्योंकि छोटे दिन के पौधे हैं। सोयाबीन को 6.0 – 7.5 पीएच (pH) सीमा वाली अच्छी तरह से सूखी और उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है। सर्वोत्तम प्रकार की मिट्टी अच्छा कार्बनिक पदार्थ की सामग्री वाली चिकनी बलुई मिट्टी है। जल भराव मिट्टी सोयाबीन की खेती के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

सोयाबीन के लिए एक अच्छी बीज की क्यारी की आवश्यकता होती है जिसमें उचित बारीक कण-आकार हों और बहुत अधिक ढेले न हों। भूमि अच्छी तरह से समतल और फसल की ठूँठों से मुक्त होनी चाहिए। मोल्ड बोर्ड हल से एक गहरी जुताई और उसके बाद दो बार पाटा लगाना या स्थानीय हल से दो जुताई पर्याप्त हैं। बुवाई के समय क्षेत्र में इष्टतम नमी होनी चाहिए।

औसतन सोयाबीन के लिए अपनायी जाने वाली बीज दर के आधार पर  अंतराल 16 किग्रा – 20 किग्रा/एकड़ होती है।

1 या 2 गुड़ाई सहित इंटरकल्चरल संचालन शुरुआत से ही खेत को खरपतवार मुक्त रखने में सहायक होते हैं

सोयाबीन की फसल की पोषण संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर, सोयाबीन के उच्च उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता के लिए मिट्टी और पत्तियों में (फोलियर) अनुप्रयोग के लिए निम्नलिखित अनुसूचियाँ अनुशंसित की जाती हैं:

खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन उगाया जाता है और उच्च वर्षा के कारण सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हालाँकि फसल के फूल आने और फली बनने के चरण के दौरान जल दबाव से बचना चाहिए।

खरपतवार

एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री खरपतवारें दोनों ही सोयाबीन की फसल को ग्रस्त कर देती हैं। एकाइनोक्लोवा एसपी (Echinocloa sp) एक सामान्य रूप से होने वाली खरपतवार है जो प्रभावी रूप से नियंत्रित न किए जाने पर महत्वपूर्ण उपज हानि का कारण बनती है।

खरपतवार प्रबंधन

  • शाकनाशी इमैज़ेथैपायर 10 एसएल @ 1.0 लीटर/हैक्टेयर बुवाई के 15-20 बाद या प्रोपैक्विज़ाफ़ॉप 10% ईसी @ 625 मिलीलीटर/हैक्टेयर बुवाई के 15-20 बाद छिड़काव अनुप्रयोग एकाइनोक्लोवा एसपी (Echinocloa sp) सहित एकबीजपत्री खरपतवार को नियंत्रित करने में सहायता करता है।
  • बुवाई के 15-20 बाद (प्रोपेक्विज़ाफ़ॉप + इमेज़ेथैपायर) एमईए @ 2.0 लीटर/हैक्टेयर जैसे एक संयोजन उत्पाद का अनुप्रयोग, एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री खरपतवारों दोनों को नियंत्रित करता है।
  • सोयाबीन में खरपतवार प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाने वाले अन्य शाकनाशी हैं डाइक्लोसुलैम 84% डब्ल्यूडीजी @ 12.4 ग्राम/एकड़ बुवाई के 1-3 दिन, (फोमेसैफेन + क्विज़ैलोफॉप) ईसी @ 1.0 लीटर/हैक्टेयर बुवाई के 15-20 बाद, क्लोरिमुरॉन इथाइल @ 37.5 ग्राम/हैक्टेयर बुवाई के 15-20 बाद।
  1. चना फली वेधक (ग्राम पॉड बोरर) का प्रबंधन
    • फेरोमोन जाल स्थापित करें
    • फसल पर एचए एनपीवी (Ha NPV) @250 लीटर/हैक्टेयर, (या)
    • क्विनाल्फॉस 25 ईसी @ 1.5 लीटर/हैक्टेयर, (या)
    • इंडोक्साकार्ब 14.5 एससी @ 500 मिलीग्राम/हैक्टेयर का छिड़काव करें।
  2. तंबाकू इल्ली का प्रबंधन
    • फेरोमोन जाल स्थापित करें
    • खेत का अच्छी तरह से सर्वेक्षण करें और उन पौधों के हिस्सों/पौधों को हटा दें जो इल्लियों के झुंड चरण में हैं।
    • फसल पर एस1 एनपीवी @ 250 लीटर/हैक्टेयर का छिड़काव करें, या
    • क्विनअल्फॉस 25 ईसी @ 1.5 लीटर/हैक्टेयर या इंडोक्साकार्ब 14.5 एससी @ 500 मिलीलीटर/हैक्टेयर या स्पाइनेटोरैम 11.7 एससी @ 450 मिलीग्राम/हैक्टेयर जैसे कीटनाशकों का छिड़काव करना।
  3. सोयाबीन तना मक्खी (स्टेम फ्लाई) का प्रबंधन
    • थायामेथोक्जैम 30 एफएस @ 10 ग्राम/किग्रा से बीज का उपचार करें
  4. सेमिलूपर्स का प्रबंधन
    • पोटाश सहित उर्वरकों की अनुशंसित खुराक का अनुप्रयोग।
    • क्विनअल्फॉस 25 ईसी @1.5 लीटर/हैक्टेयर या क्लोरैंट्रानिलिप्रोल 20 एससी @ 100 मिलीलीटर/हैक्टेयर या इंडोक्साकार्ब 14.5 एससी @ 500 मिलीलीटर/हैक्टेयर या पूर्व-मिश्रण कीटनाशक बीटासाइफ्लुथ्रिन +इमिडाक्लोप्रिड @ 350 मिलीग्राम/हैक्टेयर जैसे कीटनाशकों का छिड़काव करना।
  5. सफेद मक्खी (व्हाइट फ्लाई) प्रबंधन
    • थायामेथॉक्ज़ाम 30 एफएस @ 10 ग्राम प्रति किलोग्राम से सोयाबीन के बीज का उपचार;
    • पीले चिपचिपे जाल की स्थापना
    • वाईएमवी संक्रमित सोयाबीन के पौधों को हटाना
    • बाद के चरण में सफेद मक्खियों के नियंत्रण के लिए पूर्व-मिश्रण कीटनाशक बीटासाइफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड @ 350 मिलीग्राम/हैक्टेयर कीटनाशक का छिड़काव

रोगों के वितरण, आर्थिक महत्व के आधार पर प्रमुख और मामूली में अभिज्ञात और वर्गीकृत किए गए तेईस रोग। मायरोथेसियम पत्ती धब्बे, अल्टरनैरिया पत्ती धब्बे, किट्ट (रस्ट), ग्रीवा विगलन (कॉलर रॉट), फली और तना अंगमारी (पॉड एण्ड स्टेम ब्लाइट), श्यामव्रण और फली अंगमारी (एन्थ्रेकोनोज एण्ड पॉड ब्लाइट), जीवाण्विक छाले (बैक्टीरियल पस्ट्यूल), पीला मोज़ेक और कोई फली नहीं संलक्षण (नो पॉडिंग सिंड्रोम) प्रमुख के रूप में वर्गीकृत किए गए थे।

सोयाबीन में रोग प्रबंधन

  • रोग-प्रतिरोधी पंक्तियों/किस्मों की बुवाई
  • 4:2 के अनुपात में मक्का और ज्वार और बाजरा के साथ अंतरफसल करना।
  • कार्बोक्सीन + थिरम @ 2 ग्राम या थिरम और कार्बेंडाज़िम के साथ 2:1 @ 3 ग्राम/किग्रा के अनुपात में बीज उपचार
  • बायोकंट्रोल एजेंटों अर्थात् ट्राइकोडर्मा विरीड (Trichoderma viride) और स्यूडोमोनस फ्लुरेसेन्स (Pseudomonas fluorescens) के साथ बीज उपचार
  • पत्तों के रोगों के प्रबंधन के लिए कार्बेन्डाज़िम या थायोफैनेट मिथाइल के दो छिड़काव अनुप्रयोग और किट्ट (रस्ट) बीमारी का प्रबंधन करने के लिए हेक्साकोनैज़ोल, प्रोपिकोनैज़ल, ट्राइएडिमेफ़ोन और ऑक्सीकार्बोक्सिन (0.1%) जैसै कवकनाशियों का छिड़काव।
  • जब पौधे परिपक्वता तक पहुँचते हैं, तो पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं और झड़ जाती हैं और सोयाबीन की फलियाँ जल्दी सूख जाती हैं
  • फसल कटाई के समय, बीज की नमी की मात्रा 15 प्रतिशत या उससे कम होनी चाहिए।
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