प्याज की खेती युक्तियाँ

प्याज एक ठंडे मौसम की फसल है। फसल 13-24 डिग्री सेल्सियस की तापमान सीमा में अच्छी तरह से पनपती है। अच्छी तरह से जल निकासी सुविधाओं के साथ लाल दुमट से काली मिट्टियाँ प्याज की खेती के लिए सबसे उपयुक्त हैं। प्याज के लिए 5.8 – 6.5 पीएच (pH) सीमा इष्टतम है। प्याज लवणता के प्रति बहुत संवेदनशील हैं और इसलिए लवणीय मिट्टी और नमकीन सिंचाई के पानी से बचना चाहिए।

अच्छी जुताई प्राप्त करने और मेड़ें और हल रेखा बनाने के लिए 5-6 जुताईयाँ करके भूमि को तैयार किया जाता है। प्याज की खेती के लिए मिट्टी बहुत भुरभुरी और उपजाऊ होनी चाहिए।

1 एकड़ में प्याज के पौधे लगाने के लिए लगभग 4 किलोग्राम बीज से बनायी गई एक पौधा-घर क्यारी पर्याप्त है। 45-दिन पुराने पौधों (सीडलिंग्स) को मेड़ों के दोनों तरफ प्रत्यारोपित किया जाता है। पंक्ति से पंक्ति का 15 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे का 10 सेंटीमीटर का अंतराल आदर्श होता है।

प्याज की फसल के लिए 2-3 निराई पर्याप्त हैं। 2 से 3 सिंचाई के बाद, मिट्टी चढ़ाने का काम भी किया जाता है।

प्याज पोषक तत्वों के प्रति एक उच्च अनुक्रियाशील फसल है। देशी मिट्टी की उर्वरता के निरंतर क्षय और प्याज के खेतों में कई पोषक तत्वों की कमी की होने को ध्यान में रखते हुए, यह महत्वपूर्ण है कि प्याज की उच्च पैदावार पैदावार और बेहतर गुणवत्ता के लिए प्याज के पोषक तत्वों का प्रबंधन उचित और प्रभावशाली तरीके से निष्पादित किया जाए। प्याज की फसल के पोषण तत्वों के प्रबंधन के लिए मिट्टी और पत्ते पर अनुप्रयोग की निम्नलिखित अनुसूची की अनुशंसा की जाती है।

मिट्टी में अनुप्रयोगों के लिए उर्वरक की अनुशंसा

 

उर्वरक उत्पादों का अनुशंसित पत्तियों पर (फॉलियर) अनुप्रयोग

स्थापना के बाद साप्ताहिक अंतराल पर सिंचाई करें। ड्रिप सिस्टम की स्थापना की अनुशंसा की जाती है।

खऱपतवार

प्याज डैक्टाइलोक्टेनियम इजिप्टियम, एलुसिन इंडिका, साइनोडॉन डैक्टाइलॉन, सायपेरस रोटंडस, और पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस जैसी खरतपवारों से पीड़ित होता है।

खरपतवार प्रबंधन

रोपण के 1-3 दिन बाद पेन्डिमेथैलिन @ 3.5 लीटर/हेक्टेयर या प्रत्यारोपण के 15-20 दिन बाद ऑक्सीफ्लोरफेन @150-250 ग्राम/हेक्टेयर का उभरने-से-पूर्व अनुप्रयोग और उसके बाद 45 दिन पर हाथ से निराई, प्याज में खरपतवार को नियंत्रित करने में सहायता करती है।

  1. थ्रिप्स और प्याज मक्खी का प्रबंधन
    थ्रिप्स और प्याज मक्खी को मिथाइल डेमेटोन 25 ईसी 1 मिलीलीटर/लीटर या डायमिथोएट 30 ईसी 1 मिलीलीटर/लीटर का छिड़काव करके नियंत्रमत किया जा सकता है या फाइप्रोनिल 2 मिलीलीटर/लीटर पर 0.5 मिलीलीटर स्टिकर प्रति लीटर के साथ अनुशंसित किया जाता है।
  2. कटुआ (कटवॉर्म) प्रबंधन
    मिट्टी को क्लोरपायरीफॉस @ 2 मिलीलीटर/लीटर से भिगा कर कटुआ (कटवॉर्म) को नियंत्रित किया जा सकता है।
  3. सूत्रकृमि (नेमैटोड्स) का प्रबंधन
    प्रत्यारोपण के 10 दिन बाद कार्बोफुरैन 3 जी 1 किग्रा ए.आई./हेक्टेयर या फोरेट 10 जी 1 किग्रा ए.आई./हेक्टेयर का अनुप्रयोग सूत्रकृमि (नेमेटोड) पर्याक्रमण को नियंत्रित करता है।

  1. पर्ण चित्ति (लीफ स्पॉट) का प्रबंधन
    पर्ण चित्ति (लीफ स्पॉट) रोग को मैनकोज़ेब 2 ग्राम/लीटर या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2 ग्राम/लीटर का छिड़काव करके नियंत्रित किया जा सकता है। 1 लीटर स्प्रे तरल पदार्थ में 1 मिलीलीटर टीपॉल मिलाएँ।

फसल कटाई से एक हफ्ते पहले सिंचाई रोक दी जाती है। फसल कटाई के समय प्याज परिपक्व और सूखे होने चाहिए। फसल काटने की क्रिया तब की जाती है जब 75% पत्तियाँ सूख जाती हैं या शीर्ष से ढहने के स्तर आ जाती हैं। फसल काटने का सही समय 50% शीर्ष से ढहने के एक सप्ताह बाद होता है। उठाने के बाद, खेत की गर्मी को निकालने के लिए, भंडारण से पहले शीर्षों के साथ कंदों को 10 से 15 दिन तक छाया में संसाधित किया जाना चाहिए। फिर उचित छँटाई और श्रेणीकरण किया जाता है।

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