अनार की खेती युक्तियाँ

Climate & Soils

जलवायु और मिट्टी

 

Land Preparation

भूमि की तैयारी

 

Seed Rate & Spacing

बीज दर और अंतराल

 

Intercultural Operations

इंटरकल्चरल संचालन

 

Crop Nutrition Management

फसल पोषण प्रबंधन

 

What nutrients does a pomegranate plantation require?

अनार के बागान को किन पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है?

 

What DFPCL’s Mahadhan Products meet these plant nutrition needs of a pomegranate plantation?

अनार के बागान के पौधों की पोषण आवश्यकताओं को डीएफपीसीएल(DFPCL) के कौन से महाधन उत्पाद पूरा करते हैं?

 

When, how, and how much of Mahadhan Fertilizer products to be applied for higher pomegranate yields and better fruit quality?

अनार की अधिक उपज और फल की बेहतर गुणवत्ता के लिए, कब, कैसे और कितने महाधन उर्वरक उत्पादों का प्रयोग किया जाए?

 

Irrigation Management

सिंचाई प्रबंधन

 

Weeds & Weed Management

खरपतवार और खरपतवार प्रबंधन

 

कीट रोग और रोग प्रबंधन

कीट रोग और रोग प्रबंधन

 

पौधों के रोग और रोग प्रबंधन

पौधों के रोग और रोग प्रबंधन

 

Harvesting & Post Harvest Measures

फसल काटना और फसल काटने के बाद के उपाय

 

हल्की सर्दियों के साथ अर्द्धशुष्क जलवायु और तप्त ग्रीष्म ऋतु अनार की उपज के लिए आदर्श हैं। अनार को 25-35 डिग्री सेल्सियस तापमान सीमा वाले और 500-800 मिलीमीटर की वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों सफलतापूर्वक बढ़ाया जा सकता है। फलों के विकास के दौरान गर्म और शुष्क जलवायु फल की गुणवत्ता में सुधार करती है।

अनार मिट्टी की एक व्यापक श्रृंखला पर उगाया जा सकता है। हालाँकि, यह 7.5 की पीएच (pH) वाली मध्यम गहरी, चिकनी और अच्छी तरह से सूखी मिट्टी में अच्छी तरह से उगता है। यह ऐसी मिट्टी को सहन कर सकता है जो दोमट और थोड़ी क्षारीय हो। खराब जल निकासी सुविधाओं वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

जुताई करके, पाटा लगा कर, समतल करके और खरपतवार को निकाल कर भूमि तैयार की जाती है।

5 मीटर x 5 मीटर के अंतराल के साथ, आमतौर पर एक एकड़ में लगभग 160 पौधे लगाये जाते हैं।

तैयार करना और छँटाई अनार में किए जाने वाले दो महत्वपूर्ण कार्य हैं। पौधों को एक एकल तना या बहु-तना प्रणाली में तैयार किया जाता है। जमीन के सकर्स, तने की टहनियों (वॉटर शूट्स), संकर शाखाओं, मृत और रोगी डालियों को हटाने और पेड़ को आकार देने के लिए भी छँटाई की आवश्यकता होती है।

बाग की फसल होने के कारण, अनार को भारी मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। अनुशंसित उर्वरक खुराक 600-700 ग्राम नत्रजन , 200-250 ग्राम फोस्फोरस पेंटाऑक्साइड, और 200-250 ग्राम पोटाशियम ऑक्साइड प्रति वृक्ष प्रति वर्ष है। अनार की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, अनार उत्पादकों को उचित तरीके से उर्वरक प्रबंधन प्रथाओं की योजना बनानी और उनका पालन करना चाहिए।

नत्रजन , फफोरस, पोटाशियम, कैल्शयम, मैग्नीशियम, सल्फर, आयरन, मैंगनीज, ज़िंक, कॉपर, और बोरोन

पोषक तत्व महाधन उत्पाद
नत्रजन महाधन सल्फेट (अमोनियम सल्फेट), महाधन कैल्शियम नाइट्रेट
फॉस्फोरस महाधन सुपर
पोटाशियम महाधन पोटाश, पोटाश का सल्फेट, पोटेशियम शोएनाइट,
नत्रजन + फॉस्फोरस महाधन 24:24:0, महाधन 20:20:0-13, महाधन 12:61:0
नत्रजन + पोटाशियम महाधन 13:0:45
नत्रजन + फॉस्फोरस + पोटाशियम महाधन 12:32:16, महाधन 10:26:26, महाधन 16:16:16,महाधन 19:19:19, महाधन 13:40:13
कैल्शियम महाधन कैल्शियम नाइट्रेट (फील्ड ग्रेड)
मैग्नीशियम महाधन मैगसल्फ
सल्फर महाधन बेनसल्फ, ज़िंको बेनसल्फ, महासल्फ
कैल्शियम + मैग्नीशियम + सल्फर कैल्शियम – मैग्निशियम – सल्फर
आयरन महाधन क्रान्ति फेरस सल्फ (मिट्टी में प्रयोग के लिए), महाधन तेज़ फेरस सल्फ (कीलेट्स)
ज़िंक महाधन क्रान्ति ज़िंकसल्फ 21% और 33% (मिट्टी में प्रयोग के लिए), महाधन तेज़ ज़िंक (कीलेट्स)
मैंगनीज महाधन तेज़ कॉम्बी
कॉपर महाधन तेज़ कॉम्बी
बोरोन महाधन तेज़ डीओटी और डीटीबी

दीपक फर्टिलाइजर्स उर्वरक उत्पादों की एक श्रृंखला प्रदान करता है जिन्हें अनार के उत्पादक मिट्टी में और ड्रिप सिस्टम के माध्यम से भी प्रयोग कर सकते हैं। अनार उत्पादकों द्वारा पालन की जाने वाली अनुसूची नीचे सूचीबद्ध है:

अनार उत्पादकों के लिए अनुशंसित मिट्टी के माध्यमसे उर्वरक अनुसूची नीचे दी गई है (तालिका 1):

 

ड्रिप सिंचाई सुविधाओं वाले अनार उत्पादकों के लिए अनुशंसित फर्टिगेशन अनुसूची नीचे दी गई है (तालिका 2):

 

अनार के बागान के लिए उर्वरक उत्पादों की फॉलियर स्प्रे अनुप्रयोग अनुशंसा (तालिका 3):

फूलों से फूलों का गिरना और फलों को टूटने को रोकने के लिए पुष्पण से और फसल की कटाई तक नियमित सिंचाई आवश्यक है। अनार का पेड़ सूखे की स्थिति के प्रति सहिष्णु है लेकिन इष्टतम उपज का उत्पादन करने के लिए इसे सिंचाई की आवश्यकता होती है। ड्रिप सिंचाई और आदर्श मिट्टी की स्थिति के तहत अनार को लगभग 650 एमएम पानी प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष की आवश्यकता होती है।

खरपतवार प्रबंधन

अनार के बगीचे में पेड़ों के बीच में हाथ से छिड़काव से छिड़काव की बौछार को अनार की पत्तियों पर पड़ने न देते हुए ग्लाइफोसेट @ 10 मिलीलीटर/लीटर ग्राम/लीटर या पेराक्वैट @ 10 मिलीलीटर/लीटर जैसे गैर-चयनात्मक शाकनाशियों के अनुप्रयोग द्वारा खरपरवार को नियंत्रित किया जा सकता है।

  1. अनार तितली प्रबंधन
    • सभी प्रभावित फलों को हटाना और नष्ट करना (निकास छिद्रों वाले फल)
    • तितली की गतिविधि के समय नीम का तेल 3% या एनएसकेई (NSKE) 5% का छिड़काव करें। यदि आवश्यक हो, तो इसे 15 दिनों के अंतराल पर दो बार दोहराएँ।
    • डीकैम्बरथ्रिन @ 0.0028% का उस समय छिड़काव जब 50% से अधिक फल सेट हो गए हों और दो हफ्ते के बाद कार्बैरिल @ 0.2% या फेन्वैलेरेट @ 0.005% के साथ छिड़काव को दोहराना।
  2. चूर्णी मत्कुण (मीली बग) का प्रबंधन
    • प्रभावित डालियों और छोटी शाखाओँ को हटाएँ
    • मोनोक्रोटोफ़ॉस (0.1%) या क्लोरपायरीफॉस (0.02%) या डाइक्लोरोवॉस (0.05%) का छिड़काव करें।
  1. जीवाण्विक (बैक्टीरियल) पत्ती और नोडल ब्लाइट प्रबंधन
    • रोग मुक्त रोपण सामग्री का चयन करना
    • पत्ती सिंचाई अवस्था से आरंभ करते हुए 15 दिनों के अंतराल पर 5-6 बार कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (0.25%) या कार्बेंडाज़िम (0.15%) के साथ संयोजन में स्ट्र्रेप्टोसाइक्लिन (0.025%) का छिड़काव करना।
    • गिरी हुई टहनियों, पत्तियों और फलों को बगीचे के परिसर के बाहर नष्ट कर दिया जाना चाहिए।
  2. श्यामव्रण(एन्थ्रेकनोज) और पत्ते और फलों के धब्बे का प्रबंधन
    • रोगग्रस्त फलों को इकट्ठ करके नष्ट कर दिया जाना चाहिए।
    • फलों को तोड़ने से पहले फसल पर कार्बेंडाज़िम (0.15%) या मैनकोज़ेब (0.25%) या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (0.25%) का छिड़काव करना।
  3. फल सड़ांध प्रबंधन
    • सभी प्रभावित फलों को एकत्र करके नष्ट कर दिया जाना चाहिए।
    • कार्बेंडाज़िम (0.15%) या मैनकोज़ेब (0.25%) या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (0.25%) का छिड़काव रोग को नियंत्रित करने में सहायता करता है।

नोट: एकीकृत कीट और रोग प्रबंधन के लिए, अनार के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र द्वारा फोलियर स्प्रे की एक अनुसूची तैयार और अनुशंसित की गई है। उसी का पालन किया जा सकता है।

फलों को उनके वजन, आकार और रंग के आधार पर श्रेणीबद्ध किया जाता है। फलों को 5 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर 2 महीने या 10 सप्ताह तक शीत गृह में संग्रहीत किया जा सकता है। अभिशीतन क्षति और वजन घटने से बचाने के लिए लंबे समय तक भंडारण 10 डिग्री सेल्सियस और 95% आरएच (RH) पर होना चाहिए।

Mahadhan SMARTEK