Translated- Nutrient Management in Pomegranate

अनार में पोषण प्रबंधन

अनार में पोषण प्रबंधन
March 7, 2018 No Comments Blog admin

Mahadhan

खनिज पोषक तत्व प्रकाश संश्लेषण से होने वाले वाले उत्पादन के अवयव होते हैं। कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, मैग्नीशियम, कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पौधे की काया के अवयव हैं और अन्य पोषक तत्व उत्प्रेरक के रूप में उपयोगी होते हैं। शोध के अनुसार, 10 मीट्रिक टन अनार का उत्पादन करने के लिए 11.2 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2 किलो P2O5, 17.4 किलोग्राम K2O, 4.54 किलोग्राम कैल्शियम, 0.65 किलो मैग्नीशियम, 1.48 किलो सल्फर, 0.2 किलो आयरन, 0.03 किलोग्राम ज़िंक, 0.01 किलो मैंगनीज़, 0.01 किलो कॉपर की आवश्यकता होती है। विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्वों और उर्वरक उपयोग दक्षता को देखते हुए जरूरी सकल पोषक तत्वों की मात्रा कहीं अधिक होगी। शुद्ध और सकल के बीच कम अंतर उर्वरक उपयोग दक्षता (फर्टिलाइजर यूजेस इफिशंसी- एफयूई) को ऊंचा करता है। एफयूई बढ़ाने के लिए ये तकनीकें अपनाई जा सकती हैं

  • फर्टिजेशन और फॉलिअर जैसे कुशल तरीकों से पौधे के सक्रिय हिस्सों के करीब उर्वरक अनुप्रयोग
  • फसल की चरण-वार आवश्यकता के अनुसार लीचेबल / फिक्सेबल पोषक तत्वों का बंटा हुआ अनुप्रयोग
  • उर्वरकों के कुशल (डब्ल्यूएसएफ / कीलेटेड) रूपों का इस्तेमाल, जो अम्लीय होते हैं और आसानी से उपलब्ध हैं
  • अच्छी तरह से विघटित और समृद्ध जैविक खाद, जैविक घोल, तिलहन टिकिया आदि का प्रयोग
  • रासायनिक उर्वरकों को उसके कार्बनिक समकक्ष के साथ मिलाते हुए इस्तेमाल करना
  • जैव उर्वरकों का उपयोग

उर्वरक प्रयोग की अच्छी प्रतिक्रिया पाने के लिए फसल चरण-वार पोषक तत्वों की आवश्यकता को ध्यान में रखा जाना चाहिए और अनुप्रयोग की समय सारिणी बनाई जानी चाहिए।अनार के लिए एनएपीके की खुराक 150: 60: 60 किलो है।

नाइट्रोजन: प्रजनन चरण के शुरू होने से पहले अनार में 60% नाइट्रोजन की खेप अच्छी तरह देनी चाहिए और शेष 40% को फल लगने के बाद से फलों के फैलाव के चरण तक।

फॉस्फोरस: 50% फॉस्फोरस बंद अवधि के दौरान दिया जाना चाहिए। पुष्पन के चरण में शेष 25% और फलों के विकास के चरण में 25% प्रयुक्त करना चाहिए।

पोटाश: उत्पादन से पहले 35% पोटाश प्रयुक्त किया जाना चाहिए, उत्पादन के दौरान 35% और शेष 30% को फल विकास के अंतिम चरण के दौरान प्रयोग में लाना चाहिए।

कैल्शियम: 70% कैल्शियम वानस्पतिक और पुष्पन के चरण के दौरान ड्रिप के माध्यम से और बाकी 30% फलों के विकास के दौरान फॉलिअर के माध्यम से प्रयुक्त किया जाना चाहिए।

सल्फर और मैग्नीशियम: ये नये विकास और उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण आवश्यक तत्व हैं, इसलिए इन्हें पूरे मौसम के दौरान उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्‍यूट्रिएंट्स) : 50 प्रतिशत पोषक तत्वों को बहर से पहले वानस्पतिक विकास चरण के दौरान और शेष 50% को बहर चरण के दौरान प्रयुक्त किया जाना चाहिए।

 

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