मक्‍का उत्‍पादन में जिंक की भूमिका

मक्‍का उत्‍पादन में जिंक की भूमिका
July 13, 2018 No Comments Blog admin

Mahadhan

जिंक उच्‍च पैदावार वाले मक्‍के की फसल के लिये एक सबसे महत्‍वपूर्ण माइक्रोन्‍यूट्रीएंट्स (सूक्ष्‍म पोषक तत्‍व) है।
जिंक एक माइक्रोन्‍यूट्रीएंट्स है, जिसका मतलब यह है कि मक्‍के के पौधे को इसकी जरूरत बेहद कम मात्रा में होती है। वास्‍तव में, प्रति एकड़ जिंक की जरूरत नाइट्रोजन एवं पोटैशियम की तुलना में काफी कम मात्रा में होती है।
हालांकि, जिंक की जरूरत कम मात्रा में होती है, लेकिन मक्‍के के पौधे के विकास पर इसका काफी अधिक प्रभाव पड़ता है और यह फसल के पैदावार की मात्रा को भी प्रभावित करता है।
 
मक्‍के के पौधे में जिंक की भूमिका :

  1. ग्रोथ हार्मोन्‍स और प्रोटीन्‍स के सिंथेसिस (उत्‍पादन) में मदद करता है।
  2. क्‍लोरोफिल और कार्बोहाइड्रेट मेटाबोलिज्‍म के उत्‍पादन में इसकी जरूरत होती है।
  3. मक्‍के के पौधे में कैल्सियम के स्‍थानांतरण के लिये यह आवश्‍यक है।
  4. सेल एलॉन्‍गेशन के लिये जरूरी, पत्‍ते और ग्रेन फॉर्मेशन के साथ नोड साइज में बढ़ोतरी।

 
जिंक की उपलब्‍धता को प्रभावित करने वाले कारक :

  1. मिट्टी का पीएच : जिंक की उपलब्‍धता पीएच के बढ़ने के साथ घट जाती है, उपलब्‍धता के लिये मिट्टी का आदर्श पीएच रेंज 5.0 और 7.0 के बीच होना चाहिए। मिट्टी का पीएच स्‍तर 7.0 से अधिक होने पर जिंक कम्‍पाउंड्स बना लेता है, जो पौधों के लिये अनुपलब्‍ध है और इस तरह जिंक की कमी के कई लक्षण नजर आयेंगे।
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  3. ऑर्गेनिक मॅटर (कार्बनिक पदार्थ): जिस मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ कम मात्रा में पाये जाते हैं, उसमें जिंक की मात्रा भी कम होती है और इन मिट्टियों में अक्‍सर खामियां नजर आती हैं। रेतीली मिट्टी और/या अत्‍यधिक क्षीण मिट्टी में आमतौर पर कार्बनिक पदार्थ कम पाये जाते हैं और इनमें उसका अभाव होता है।
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  5. वृद्धि की स्थिति : जिंक का ग्रहण किया जाना और उपलब्‍धता वृद्धि के मौसम में शुरूआत में ठंडक, गीली या ओवरकास्‍ट स्थितियों द्वारा नकारात्‍मक रूप से प्रभावित हो सकती है। यह अस्‍थाई अभाव जड़ों की धीमी वृद्धि के कारण होता है। जड़ प्रणाली में धीमी वृद्धि के कारण अक्‍सर मक्‍के के पौधे की शुरूआती मौसमी जरूरतों को पूरा नहीं किया जा पाता है। तापमान के बढ़ने और हालत सुधरने के साथ अभाव के लक्षण गायब होने चाहिये।
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  7. सॉईल कम्‍पैक्‍शन (मृदा संघनन) :संघटित मिट्टी में मक्‍के के पौधों के जड़ों को विकसित करने की क्षमता घट जाती है। जड़ों के अभाव के साथ जिंक मिनरल्‍स को अवरूद्ध करने का अवसर भी घट जाता है।
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  9. मिट्टी में फॉस्‍फोरस का स्‍तर :जड़ों से जुड़े फंगस माइकोरिजी के स्‍तर के मिट्टी में बढ़ने के साथ जिंक का ग्रहण किये जाने की क्षमता भी बढ़ जाती है। फॉस्‍फोरस का स्‍तर जब बढ़ता है, तो माइकोरिजी की आबादी घट जाती है। इस तरह जिंक ग्रहण करने की पौधों की योग्‍यता भी घट जाती है। इस प्रकार फॉस्‍फोरस के स्‍तर के बढ़ने से जिंक की उपलब्‍धता घट जाती है।

 
मक्‍के में जिंका का अभाव :
मक्‍के में जिंक के अभाव से जुड़े सबसे आम लक्षणों के परिणामस्‍वरूप सफेद एवं पीले रंग के धब्‍बे बीच की शिरा के साथ-साथ नजर आते हैं। जिंक के अभाव से जुड़ी अन्‍य समस्‍याओं में शामिल हैं :

  • जड़ों का कमजोर विकास
  • अवरूद्ध विकास
  • छोटी पत्तियां
  • छोटे इंटरनोड्स
  • देरी से सिल्किंग और टैसेलिंग
  • चॉकी कर्नेल्‍स

 
जिंक की कमी को दूर करने के उपाय :

  1. बुआई के समय प्रति एकड़ 10 किलो ZnSO4 (जिंक सल्‍फेट) का इस्‍तेमाल करें।
  2. मक्‍के की फसल के पीक ग्रैंड ग्रोथ स्‍टेज में 300 लीटर पानी में 1.5 किलो ZnSO4 (जिंक सल्‍फेट) का छिड़काव प्रति एकड़ करना।
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