फोलियर फीडिंग का महत्‍व

फोलियर फीडिंग का महत्‍व
August 16, 2018 No Comments Blog admin

Mahadhan

फोलियर फीडिंग पौधों को भोजन देने की एक तकनीक है जिसमें तरल उर्वरक को सीधे उनकी पत्तियों पे डाला जाता
है।
 
पोषक तत्‍व कैसे अवशोषित होते हैं?

  1. पौधे अपने पत्तियों के माध्‍यम से आवश्‍यक पोषक तत्‍वों को अवशोषित करते हैं। यह अवशोषण उनके स्‍टोमैटो और उनके एपिडर्मिस के माध्‍यम से होता है।
  2. पोषक तत्‍वों को आमतौर पर स्‍टोमैटो के जरिये ज्‍यादा तेजी से जड़ों तक पहुंचाया जाता है लेकिन कुल अवशोषण एपिडर्मिस से ज्‍यादा बेहतर ढंग से होता है।
  3. पौधे भी अपनी छाल के जरिये पोषक तत्‍वों को अवशोषित करने में सक्षम होते हैं।

 
फोलियर फीडिंग क्‍यों महत्‍वपूर्ण है:

  1. फोलियर फीडिंग पोषक तत्‍वों की उपलब्‍धता पर मृदा पीएच के असर को दूर करती है।
  2. फोलियर फीडिंग पोषक तत्‍वों को फौरन पत्तियों को पहुंचाती है। फोलियर उर्वरण (फर्टिलाइजेशन) अक्‍सर पौधे के स्‍वास्‍थ्‍य एवं वृद्धि में फौरन (कुछ ही घंटों में) सुधार लाता है।
  3. फोलियर फीडिंग कमी को ठीक करने, कमजोर अथवा क्षतिग्रस्‍त फसल को मजबूत बनाने, पौधों की वृद्धि में तेजी लाने और उनको बेहतर ढंग से बढ़ने में मदद करती है जो कि निश्चित तौर पर पहली प्राथमिकता होती है।
  4. यदि जड़ें बंद होती हैं तो फोलियर फीडिंग पोषण प्रदान करती है।
  5. फोलियर फीडिंग पौधों में पोषक तत्‍वों की कमी की देखभाल करने के लिए एक प्रमाणित दक्ष प्रविधि है और पौधे के जीवनकाल के विभिन्‍न चरणों के दौरान उसके विकास को तेजी प्रदान करती है।
  6. फोलियर फीडिंग मृदा में कमी को ठीक करने के लिए असरदार प्रविधि है और यह पोषक तत्‍वों को नमी की कमजोर परिस्थितियों में पौधे तक पहुंचाने में मृदा की अक्षमता को दूर करती है।
  7. फोलियर फर्टिलाइजेशन पैदावार बढ़ाने और पौधे का स्‍वास्‍थ्‍य उत्‍तम बनाने का सबसे कारगर तरीका है। परीक्षणों ने दर्शाया है कि फोलियर फीडिंग पैदावार को पारंपरिक उर्वरक की तुलना में 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक कर सकता है।
  8. फोलियर फीडिंग ज्‍यादा प्रभावी और सस्‍ता है।
  9. इन कारणों से, इसने दुनिया भर में कृषि में सभी का ध्‍यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

 
 
किन परिस्थितियों में फोलियर फीडिंग का इस्‍तेमाल करना चाहिये?

कुछ निश्चित परिस्थितियों में, फोलियर फीडिंग को मृदा अनुप्रयोगों की तुलना में लाभ मिलता है।

क. सीमित परिस्थितियां – फोलियर फीडिंग की अनुशंसा तब की जाती है जब पर्यावरणीय परिस्थितियां जड़ों द्वारा पोषक तत्‍वों के अवशोषण को सीमित करती हैं। इन परिस्थ्‍िातियों में मृदा पीएच उच्‍च या निम्‍न होना, तापमान तनाव, बहुत ज्‍यादा या बहुत कम मृदा नमी, जड़ों का रोग, कीटों की उपस्थिति जो कि पोषक तत्‍वों के उद्ग्रहण को प्रभावित करती है, मिट्टी में पोषक तत्‍वों का असंतुलन आदि शामिल हैं।

 
ख. पोषक तत्‍वों की कमी के लक्षण – फोलियर फीडिंग का एक लाभ है, पोषक तत्‍वों को डाले जाने पर पौधों का तीव्र रिस्‍पांस।

 
ग. विशिष्‍ट वृद्धि चरणों में – पौधों को वृद्धि के अलग-अलग चरणों में पोषक तत्‍वों की भिन्‍न मात्रा की जरूरत पड़ती है। कभी-कभी मृदा में पोषक तत्‍वों का संतुलन नियंत्रित कर पाना कठिन हो जाता है। प्रमुख चरणों के दौरान आवश्‍यक पोषक तत्‍वों का फोलियर अनुप्रयोग पैदावार और गुणवत्‍ता में सुधार कर सकता है।

 
फोलियर फीडिंग के असर में कैसे सुधार लायें?

विभिन्‍न घटक फोलियर फीडिंग के असर को प्रभावित करते हैं:

  1. फोलियर स्‍प्रे सॉल्‍यूशन का पीएच – पोषक तत्‍व उनके घुलनशील अवस्‍था में होने चाहिये ताकि पौधे उन्‍हें अवशोषित कर सकें। पीएच पोषक तत्‍वों की घुलनशीलता और पानी में दूसरे घटकों के साथ उनके अंत: क्रिया को प्रभावित करता है । अमूमन, अम्‍लीय पीएच पत्तियों की सतहों के जरिये पोषक तत्‍वों की पहुंच में सुधार करता है।
  2. सरफक्‍टेंट का प्रयोग – सरफक्‍टेंट फोलिएज के ज्‍यादा एक समान कवरेज में योगदान करते हैं। वे बूंदों के सर्फेस टेंशन को कम कर स्‍प्रे सॉल्‍यूशन के टिके रहने की क्षमता को बढ़ाते हैं।
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      सरफक्‍टेंट के बगैर                  सरफक्‍टेंट के साथ
  3. दिन का समय – फोलियर फीड का सबसे अच्‍छा समय सुबह या देर शाम होता है जब स्‍टोमैटा खुले होते हैं। यदि तापमान 80 डिग्री फैरेनहाइट या 27 डिग्री सेल्सियस है, तो फोलियर फीडिंग को अपनाने की अनुशंसा नहीं की जाती है।
  4. बूंदों का आकार – छोटी बूंदें का फैलाव व्‍यापक होता है और फोलियर अनुप्रयोगों की दक्षता बढ़ाती हैं। हालांकि, जब बूंदे बहुत छोटी होती हैं (100 माइक्रॉन से कम), तो वह बह (ड्रिफ्‍ट ) सकती हैं। Mahadhan
  5. छिड़काव की मात्रा – स्‍प्रे वॉल्‍यूम का पोषक तत्‍वों की अवशोषण दक्षता पर उल्‍लेखनीय प्रभाव पड़ता है। छिड़काव की मात्रा ऐसा होना चाहिये कि यह पौधों को पूरी तरह ढकने के लिए पर्याप्‍त हो लेकिन यह ज्‍यादा ऊंचा नहीं हो ताकि यह पत्तियों तक न पहुंचे।
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