टमाटर की पैदावार बढ़ाने के उपाय

टमाटर की पैदावार बढ़ाने के उपाय
September 14, 2018 No Comments Blog admin

Mahadhan

  1. मिट्टी का प्रकार:लाल रेतीली दोमट मिट्टी, कार्बनिक तत्‍वों से भरपूर होती है, जो कि 6.0-7.0 पीएच के साथ टमाटर की पैदावार के लिये उपयुक्‍त है।
  2. मौसम:21 डिग्री से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्‍छी गुणवत्‍ता के फल के लिये सबसे अच्‍छा होता है। 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक का तापमान फलों की खेप और विकास को प्रभावित करता है।
  3. मिट्टी की तैयारी:3-4 बार हल चलाने के साथ अच्‍छी जुताई के लिये खेत तैयार हो जाना चाहिये। खेत की तैयारी के लिये एक बार में 25 टन/हेक्‍टेयर एफवाईएम की जरूरत होती है।
  4. नर्सरी:बीज के अंकुरण के एक हफ्ते बाद, अंकुर पर (इमिडाक्‍लोप्रिड 200 एसल /हेक्‍टेयर पर 0.3 मिली./ली. या 0.3 ग्राम/ली. पर 25 डब्‍ल्‍यूपी थियोमेथोक्‍जैम) छिड़काव करें।
  5. पौधारोपण:हमेशा नर्सरी में उगाये गये स्‍वस्‍थ अंकुर चुनें, जोकि कीटों और बीमारियों से मुक्‍त हों। अंकुर को रोपने से पहले उसे 10 लीटर पानी में नुवाक्रॉन (15 मिली.) और डाइथेन (25 ग्राम) से तैयार घोल में 5-6 मिनट के लिये डुबोया हुआ होना चाहिये।
  6. अंतराल:अंतराल, उगाई गई किस्‍म और पौधा रोपण के मौसम पर निर्भर करता है। सामान्‍यतौर पर अंकुर को कतार से कतार 75-90 सेमी और पौधे से पौधे को 45-60 सेमी. के अंतराल पर रोपा जाता है।
  7. उर्वरक:मिट्टी में अच्‍छी तरह से तैयार एफवाईएम मिला होता है। वांछित पैदावार के लिये 120 किलो N, 80 किलो P2O5 और 50 किलो K2O को प्रति हेक्‍टेयर डालने की सलाह दी जाती है। N की आधी मात्रा और P व K की पूरी मात्रा पौधारोपण के समय दी जाती है। पौधे को एक जगह से दूसरे जगह लगाने के बाद, 30 दिनों तक टॉप ड्रेसिंग दी जाती है।
  8. सिंचाई:लंबे समय तक सूखे के बाद ज्‍यादा पानी डालने से फलों में दरार आ जाती है। पौधारोपण के 3-4 दिनों के बाद हल्‍की सिंचाई की जानी चाहिये। खरीफ के दौरान 7-8 दिनों के अंतराल, रबी के दौरान 10-12 दिनों के अंतराल और गर्मियों में 5-6 दिनों के अंतराल पर सिंचाई की जानी चाहिये।
  9. फूलों का खिलना और फल का बढ़ना टमाटर के लिये महत्‍वपूर्ण चरण होते हैं; इसलिये इस दौरान पानी की कमी नहीं होनी चाहिये।
  10. खरपतवार नियंत्रण:खरपतवार को मल्चिंग के साथ पेंडिमेंथेलियन (0.75 किलो एआई/हेक्‍टेयर) या ऑक्‍सीफ्लूरोफेन (0.12 किलो एआई/हेक्‍टेयर) जैसे तृणनाशकों के साथ नियंत्रित किया जा सकता है।
  11. फसल चक्र:टमाटर की दो फसलों के बीच एक साल का अंतर होना चाहिये। मक्‍का, गेहूं, बाजरा जैसे सोलोनेशियस फसलों से फसल चक्र करने की सलाह दी जाती है।
  12. स्‍टेकिंग:स्‍टेकिंग इंटरकल्‍चरल की सुविधा प्रदान करता है और फलों की गुणवत्‍ता बनाये रखने में मदद करता है। पौधारोपण के 2-3 हफ्तों के अंदर इसे किया जाता है।
  13. वृद्धि नियंत्रक:
    ए. बेहतर अंकुरण के लिये गिब्‍रेलिक एसिड (जीए) को 40-100 मिली ग्राम/ली. घोल के साथ बीजों को उपचारित करने के लिये प्रयोग करें।
    बी. गिब्‍रेलिक एसिड (जीए) को पौधे की वृद्धि के दौरान 10-20 मिली ग्राम/ली. घोल के साथ फॉलियर स्‍प्रे करें।
    सी. फूलों के खिलने, फलों के बढ़ने और पैदावार के दौरान 100-500 मिली ग्राम/ली. घोल के साथ इथेफोन को फॉलियर स्‍प्रे करें।
    डी. फसलों की कटाई से पहले फलों को बेहतर पकाने के लिये 1000 मिली ग्राम/ली. घोल के साथ इथेफोन का छिड़काव करें।
    ई.पीसीपीए- (ऑक्सिन) या 4 क्‍लोरो फिनॉक्‍सी एसेटिक एसिड को 50-100 मिली ग्राम/ली. घोल के साथ छिड़काव करें क्‍योंकि फूलों के कम खिलने के दौरान फॉलियर स्‍प्रे करने से फलों को उच्‍च तापमान पर सेट करने में मदद मिलती है।
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