अड़साली गन्‍ने को रोपने और उसकी शुरूआती वृद्धि के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां

अड़साली गन्‍ने को रोपने और उसकी शुरूआती वृद्धि के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां
August 29, 2018 No Comments Blog admin

Mahadhan

अड़साली गन्‍ने को जून से अगस्‍त के महीनों के दौरान कृषिजलवायु संबंधी क्षेत्र में होने वाली बारिश के स्‍वरूप के आधार पर रोपा जाता है। अड़साली गन्‍ने को विकसित होने में लगभग सोलह से अठारह महीनों का समय लगता है और इसलिये इसमें सबसे ज्‍यादा गन्‍ना और चीनी प्रदान करने का सामर्थ्‍य होता है। बेहतर वृद्धि और पैदावार के लिये इसकी शुरूआत काफी अच्‍छी होनी चाहिये, ताकि वृद्धि के प्रत्‍येक चरण में इसका बेहतर विकास हो सके। इसे हासिल करने के लिये बरती जाने वाली कुछ महत्‍वपूर्ण सावधानियां निम्‍नलिखित हैं।

  1. गहरी जुताई (यदि जरूरत हो तो दो बार) के साथ प्रारंभिक जुताई और हॉरोइंग काफी महत्‍वपूर्ण है, ताकि कड़ी मिट्टी को तोड़ा जा सके और खरपतवारों और रोग तथा कीट के प्रादुर्भाव को कम किया जा सके।
  2. खेत में एक समान रूप से प्रसार के लिये जैविक खाद की जरूरत होती है और मेड़ एवं खांचों के खुलने से पहले इसे मिट्टी में मिलाया जाता है।
  3. पौधों को चार गुणा दो या पांच गुणा दो फीट की दूरी पर रोपा जाना चाहिये, ताकि बेहतर परिणाम प्राप्‍त किये जा सकें। इसके अनुसार ही मेड़ एवं कुंड को पहले से खोला जा सके।
  4. अड़साली मौसम के लिये गन्‍ने को रोपे जाने हेतु ऐसी किस्‍म को चुना जाना चाहिये जिन्‍हें उसे क्षेत्र में रोपा जा सके और नर्सरी से नौ से दस महीनों के स्‍वस्‍थ बीज सामग्री का इस्‍तेमाल पौधे रोपने के लिये किया जाना चाहिये।
  5. गन्‍ने के बीज के टुकड़े (प्‍लांटिंग मैटेरियल) को रोपने से पहले उस क्षेत्र के लिये परामर्शित कीटनाशक और फफूंदनाशक से उपचारित करना चाहिये।
  6. पौधों को सूखी मिट्टी या उपयुक्‍त नमी वाली स्थिति में रोपा जाना चाहिये। गीली मिट्टी में पौधों को रोपने से बचना चाहिये।
  7. वैज्ञानिक रूप से काटे गये एक या दो आँख की कली (आइ बड) को बीज के टुकड़े कुंड में रखने चाहिये और इन्‍हें मिट्टी से हलके से ढकना चाहिये, तीव्र अंकुरण के लिए कलमों को किनारे की ओर रखना चाहिये।
  8. उर्वरक की बेसल खुराक को पौधा रोपण मेड़ में डालना चाहिये और इसे बेहतर शुरुआत के लिए पौधा रोपण से पहले मिट्टी में मिलाया जाना चाहिये।
  9. एक समान अंकुरण के लिए हलका एवं बार-बार बूंद-बूंद में सिंचाई करनी चाहिये।
  10. अंकुरण के बाद, प्रत्‍येक एकड़ तीन सौ लीटर पानी के साथ प्रत्‍येक दस ग्राम प्रति लीटर महाधन स्‍मार्ट 24:24:0 + 13:00:45 का दो से तीन बार छिड़काव करना चाहिये। जडों एवं तनों की मजबूत वृद्धि शुरू करने के लिए दस दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिये।
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